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Thursday, 31 December 2015
Tuesday, 20 October 2015
Goddess Siddhidatri
In the beginning of the universe Lord Rudra worshipped Adi-parashakti for Creation. It is believed that goddess Adi- Parashakti had no Form. The Supreme Goddess of Power, Adi-parashakti, appeared in the form of siddhidatri from the Left half Of lord shiva. Goddess Siddhidatri is worshipped on the ninth day of Navratri.
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| Goddess Siddhidatri |
It is believed that Goddess Siddhudatri Provides Direction and energy to planet Ketu. Hence Planet Ketu is governed by her. Goddess Siddhidatri Sits on kamal and rides on the lion. She is depicted with Four hands. She has gada in the one right hand, chakra in the other right hand, lotus flower in the one left hand and shankh in the other left hand.She is the Goddess who possesses and bestows all type of siddhis to her devotees. Even lord shiva got all siddhis by grace of goddess siddhidatri.she is worshipped by not only humans but also by Deva, Gandharva, Asura, Yaksha and Siddha. Lord Shiva got the title of Ardhanarishwar when goddess siddhidatri appeared From his left half.
माता सिद्धीदात्री
मा
दुर्गा आपल्या नव्या रुपात सिद्धीदात्री नावाने जाणली जाते. मातेचे चार हाथ आहे
मातेचा वाहन कमळ आहे, यांच्या दहिने खालच्या हातात गदा और वरच्या हातात चक्र
आहे आणि बायेंच्या वरच्या हातात शंख आणि खालच्या हातात कमल पुष्प
आहे. नवरात्रीच्या नव्या दिवशी यांची पूजा केली जाते. या दिवशी माता
सिद्धीदात्रीची उपासना केली जाते. माता सिद्धिदात्री
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| माता सिद्धिदात्री |
माँ दुर्गा अपने नौवें स्वरूप में सिद्धिदात्री के नाम से जानी जाती है। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। माँ सिद्धिदात्री चार भुजाओं वाली हैं। इनका वाहन सिंह हैं और इनका आसन कमल है। इनकी दाहिनी तरफ़ के नीचे वाले हाथ में गदा, ऊपर वाले हाथ में चक्र तथा बायीं तरफ़ के नीचे वाले हाथ में ऊपर वाले हाथ में शंख और नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प है। नवरात्रे - पूजन के नवें दिन इनकी उपासना की जाती है. इस दिन माता सिद्धिदात्री की उपासना से उपासक की सभी सांसारिक इच्छायें व आवश्यकताएँ पूर्णं हो जाती हैं। नवरात्र के नवम् तथा अंतिम दिन समस्त साधनाओं को सिद्ध एवं पूर्ण करने वाली तथा अष्टसिद्धि नौ निधियों को प्रदान करने वाली भगवती दुर्गा के नवम् रूप मां सिद्धिदात्री की पूजा अर्चना का विधान है। देवी भगवती के अनुसार भगवान शिव ने मां की इसी शक्ति की उपासना करके सिद्धियां प्राप्त की थीं। इसके प्रभाव से भगवान का आधा शरीर स्त्री का हो गया था। उसी समय से भगवान शिव को अर्द्धनारीश्वर कहा जाने लगा है।
इस रूप की साधना करके साधक गण अपनी साधना सफल करते हैं तथा सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं। वैदिक पौराणिक तथा तांत्रिक किसी भी प्रकार की साधना में सफलता प्राप्त करने के पहले मां सिद्धिदात्री की उपासना अनिवार्य है।
Goddess Mahagauri
Durga Avatar mahagauri shellfish and white characters very
similar to lunar stripe maa mahagauri Durga is the eighth form. The eighth day
of Navratri puja is Mahagura. It is the consort of Shiva. After austerity
Goddess Shiva as her husband had received
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| Goddess Mahagauri |
The body is very blonde goddess Mahagura. Mahagura white
robes and jewelery have also been defeats the Unhnr shwetamber Mahagura four
arms of which drum and trident in his two hands, and the other two arms of the
Abbey and is wise currency. His vehicle is a cow. Some of these Mahagura
narrative is falling. Purportedly to get Lord Shiva because of his harsh
austerity Mother Parvati was black and emaciated body, was pleased with the
penance Lord Shiva and Parvati's mother washed the body Ganga why she was noticed
electrical goods blaze mahagauri mother's name is venerated.
माता महागौरी
दुर्गाजी महागौरी अवतार शंख और चंद्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी माँ महागौरी माँ दुर्गा का आठवां स्वरुप है. नवरात्री के आठवें दिन महागौरा की पूजन की जाती है. यह शिव जी की अर्धांगिनी है. कठोर तपस्या के बाद देवी ने शिव जी को अपने पति के रूप में प्राप्त किया था
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| माता महागौरी |
देवी महागौरा के शरीर बहुत गोरा है. महागौरा के वस्त्र और आभूषण श्वेत होने के कारण उन्हें श्वेताम्बर धरा भी कहा गया है महागौरा की चार भुजाएं है जिनमें से उनके दो हाथो में डमरू और त्रिशूल है तथा अन्य दो हाथ अभय और वार मुद्रा में है. इनका वाहन गाय है. इनके महागौरा पड़ने की भी कथा कुछ इस प्रकार है. मान्यतानुसार भगवन शिव को पाने के लिए गए अपने कठोर तप के कारण माँ पार्वती रंग काला और शरीर क्षीण हो गया था, तपस्या से प्रसन्न होकर जब भगवान शिव ने माँ पार्वती का शरीर गंगाजल से धोया तो वह विद्युत प्रभा के सामान गौर हो गया इसी कारण माँ को महागौरी के नाम से पूजते है.
माहागौरी
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| माहागौरी |
दुर्गच्या आठवा अवतार महागौरी आहे. माता श्वेतवणी आहे. आठव्या दिवशी मातेच्या या रुपात पूजा केली जाते हि शिवची अर्धागिनी असून शिवच्या कठोर तपस्या नंतर शिव तिला पतीच्या रुपात प्राप्त झाले होते. मातेचे कपडे दागिने श्वेतवणीअसल्यामुळे मातेला श्वेतांबरी म्हटल्या जाते मातेचे वाहन गाये आहे. महागौरी कथा आशी आहे कि शिवच्या प्राप्तीसाठी केलेल्या कठोर तप्स्यामुळे मातेचा रंग काळा व शीण झाला होता. तपस्येने प्रसन्न होऊन शिवाने मातेचे शरीर गंगा जाळणे धुतले मातेचे रंग गोरा झाला म्हणून मातेला महागौरा म्हटल्या जाते. अष्टमी दिवशी मातेला भोग दाखवला जातो.
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दुर्गाजी महागौरी अवतार शंख और चंद्र के समान अत्यंत श्वेत वर्ण धारी माँ महागौरी माँ दुर्गा का आठवां स्वरुप है . नवरात्...





